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संभावित भूगर्त कक्ष एवं सुरंग

Baradari संभावित भूगर्त कक्ष एवं सुरंग

संभावित भूगर्त कक्ष एवं सुरंग सह बारादरी के ध्वंशावशेष

हदफ स्थित बारादरी (अक्षांस 250 4’ 31” उत्तर, देशांतर 870 46’ 47” पूर्व) झारखण्ड की राजधानी से 480 किलोमीटर तथा जिला मुख्यालय साहेबगंज से 32 किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित है । बारादरी को नागेश्वर बाग के नाम से भी जाना जाता है । इसके निर्माताओं के बारे में विवाद है । कुछ विद्वान इसके निर्माण का श्रेय राजा मान सिंह के शत्रु फतेह खान को देते है वहीं कुछ विद्वान यह मानते है कि इसका निर्माण बंगाल के नवाब मीर कासिम अली के द्वारा किया गया था । एक ऊंचे टीले पर 18.10 X 16.25 वर्ग मीटर के चबुतरे पर बने इस इमारत में 9 मीटर की ऊंचाई तक की ईटों की दीवारें है । वर्तमान में दीवारों की उचाई 5 मीटर है । परिसर के एक कोने में इसका प्रवेश द्वार है जिसके साथ प्रहरियों के कक्ष बने हैं । अन्दर की दीवारों से लगकर कई पंक्तिबद्ध कक्ष हैं जिनमें प्रत्येक के साथ एक खुला प्रांगण बना है, जिनमें महिलाओं व उनकी परिचारिकाओं का वास होता रहा होगा । इनसे जुडा एक केंद्रीय कमानीदार दीर्धा है जो भीतरी आंगन में खुलता है ऐसा विश्वास है कि इस आंगन के मध्य में लकडियों से बनी एक वर्गाकार इमारत बनाई गई थी जिसे रंगमहल कहा जाता था । वर्तमान में इस रंगमहल के कोई अवशेष हमें नही मिलते ।